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कन्याये //माताकी कंजके//

Posted On: 19 Apr, 2011 Others में

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अभी अभी नव रात्रि पर्व गया हे
सबने खूब पूजा अर्चना व्रत किये
जागरण जगराते भजन हुए
पर एक बात मन में कई
सवाल बुनकर उलझन में ll कर नये सवाल खड़े कर गयी .जब अख़बार में खबर छपी की //पूजा के लिए कन्या नही मिली //
अभी यह हाल हे तो कुछ समय बाद
हम क्या कहेंगे की
//कंजक //पूजन में चली कन्या मिली न कोई
घर में कन्या न जन्मे .तो बाहर कहा से होई
वंश बढ़ेगा बेटे से .चाहे हे सब कोई
दादी ,नानी ,काकी मामी बुआ ,मासी
सब भी तो हे नारी
फिर कन्या को जन्म न देना
ऐसी क्या लाचारी
बेटे का घर तभी बसेगा
जब होगी कोई नारी
ईश्वर दे रहा तुम्हे ,कन्या रूप में सोगात
तो झोली भर लो .इसे करो आत्मसात
क्या तुमको मालूम नही हे .इस नेमत से
खाली रह गये .राजा महाराजा के हाथ
आओ ह्रदय से स्वीकारे हम बेटियों को
अरे वंश तू बढाती हे .शान तू बढाती हे
फिर तेरे ही जन्म से .शान क्यों घट जाती हे

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Usha के द्वारा
April 28, 2011

बहुत बढ़िया…साधारण शब्दोँ में कितनी बड़ी बात कही है ..

narayani के द्वारा
April 21, 2011

नमसकार हरीष जी  आपने रचना को सराहा -    आपका बहुत बहुत आभार . नारायणी

Harish Bhatt के द्वारा
April 21, 2011

नारायणी जी नमस्ते……. बेहतरीन कविता के लिए हार्दिक बधाई. आओ ह्रदय से स्वीकारे हम बेटियों को अरे वंश तू बढाती हे .शान तू बढाती हे

    Jayna के द्वारा
    July 11, 2016

    Nicely done. I often like just sticking with the simplicity of a camera and lens yet finding lighting situations that work. A lot less to lug ardo#u&n8230;

Alka Gupta के द्वारा
April 20, 2011

नारायणी जी, कन्या के महत्त्व पर प्रकाश डालती सुन्दर काव्य रचना !

    narayani के द्वारा
    April 21, 2011

    अलका जी नमसकार आपको रचना पसदं आई. धन्यवाद.

nishamittal के द्वारा
April 19, 2011

समाज में संतुलन बनाये रखने के लिए हमें यह महत्व समझना ही होगा नारायणी जी.कृपया पढ़ें गद्दी डोली सरकार बोली.

    narayani के द्वारा
    April 20, 2011

    नमसकार निशाजी धनयवाद गदी डोली सरकार बोली पढकर बहुत अचछा लगा  नारायणी


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