narayani

Kuch anubhav... Kuch vichar...

40 Posts

13533 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4337 postid : 113

अंश

Posted On: 4 Mar, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अंश

जब मैं, आपका अंश ,अपनी माँ की कोख में आया

आपका बढेगा वंश ,यह सोच आपका मन हर्षाया

माँ की कोख में ही था ,हरदम आपने मुझ प्यार लुटाया

आया जब में इस दुनिया में ,आपने अपना प्रतिरूप पाया

अचानक क्या हुआ सहमा में ,मुझ पर से हट गई आपकी छाया

हे मेरे जनक ये क्या हुआ ,किस छलावे में आपका मन भरमाया

पृथ्वी में पोधा रोपे माली भी तो ,उसका ध्यान रहता उसी में समाया

पर ये क्या मेरे जनक ,रुपहली सुनहली रूप की पड़ी आप पर छाया

अपनी उसी चकाचोंध में भूले सब ,पौधा था आपका नन्हा आपने मुझे भुलाया.

नारायणी



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

354 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
March 7, 2012

नारायणी जी सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिये बधाई एवं होली की शुभकामनायें…… कृपया इसे पढ़कर अपने विचारों से अवगत करायें- http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/03/04/क्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

    narayani के द्वारा
    May 6, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 4, 2012

नारायणी जी बहोत सुन्दर भाव ………लिखते रहें

    narayani के द्वारा
    May 6, 2012

    धन्यवाद आनन्द प्रवीन जी

nishamittal के द्वारा
March 4, 2012

सुन्दर भाव बहुत दिनों बाद पधारने पर स्वागत

    narayani के द्वारा
    March 4, 2012

    namskar nisha ji aapka bahut dhanyavad . narayani

chandanrai के द्वारा
March 4, 2012

any thing written on maaa is golden poem

    narayani के द्वारा
    March 4, 2012

    namskar ji aapka dhanyavad . narayani

    Dortha के द्वारा
    July 12, 2016

    No creo que sea tan fácil. Aunque en realidad es como señala Makahui, DUDO que la institución a quien le adeuden el inmueble vaya a absorber ese impuesto así nada más sin pelear.Estoy casi seguro que le dirían que deberá dosificarlo en “n” meses o le querrían cargar el IDE a la persona depositante.No sería mala idea que Mar se informara y nos pudiera compartir el resletado.Recuerdun que todo este tipo de instituciones, no pierden, y cuando pierden, arrebatan!Un saludo!


topic of the week



latest from jagran