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गाज

Posted On: 2 Jan, 2013 में

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दामिनी तुम नही हुई बेआवाज
तुम तो हो एक कड़कडाती गाज …………
जो गिरती है घडघडा कर,
तो ध्वस्त हो जाते हैं
राजा महाराज के राज ….
अरे कायरो क्या तुम्हे पता नही
नारी से है तुम्हारे घर, वंश की शानो साज …..
चुल्लू भर पानी की भी दरकार नही थी
शर्म से ही वही मर जाते तुम ,
जब मन तुम्हारा कलुषित हुआ ,
एक अबला की लूटने को लाज ……
नारी शक्ति रौद्र हो गई अगर ……
तुम्हारे झूठे पुरुषत्व के उतर जायेंगे ताज
बहन बेटी के रखवाले कहे जाने वाले
तुम बन गये गिद्ध ,बाज
शर्म से नजरे न उठ पा रही अब
कहा है हिन्दुस्तानी सभ्यता का नाज
दामिनी तुम यही हो यही हो
हर दिल सिसक रहा तुम्हारे लिए आज
नारायणी

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
January 3, 2013

नारायणी जी, आपकी इस सुन्दर ओजपूर्ण रचना में दामिनी के प्रति श्रधांजलि -स्वरुप भावनाएं मुखर हो रहीं रहीं है जो ह्रदय -स्पर्शी हैं .. इस हेतु आपको हार्दिक वधाई…

    narayani के द्वारा
    January 15, 2013

    नमस्कार ,सुषमा जी दामिनी जैसी कितनी बहन बेटिया त्रस्त है आज . नारी को देवी कहते हुए …….ऐसे आघात . धन्यवाद नारायणी

    Rose के द्वारा
    July 11, 2016

    Ha , well spotted! Hope ‘s a happy man. And for other readers here; yes, he sells them, just ask him.Also I am envious of your gift. In a nice way envious. Clearly I sh#&2dnuo8l17;t run a web site, I should write reviews Happy Thanksgiving and glad you received this boiler, I know it’s found a good home.


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