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''क्यों न समझी पीड़ा ''

Posted On: 26 Apr, 2013 में

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”क्यों न समझी पीड़ा ”

जन्म पर न बजी बधाई – मेरे
बेटे को जन्म दे दिया – मैने
नगाड़े बज उठे अंगना मैरे
भेद तो ये अपनो ने ही करे

सरेआम खुद को शर्मसार कर
कोख को लजा दिया मेरी
अब क्या बजना बाकी है???????????
इस घिनौनी हरकत पर तेरी

… नारी हूँ ,नारी ही ना समझ
बिगड़ी तो काल बनूंगी तेरी
तू अदना सा आदम क्या जाने
ऋषि, देवो ने की स्तुति मेरी

जब श्रापित होओगे पीड़ा से मैरी
किसी जन्म में मुक्ति नही तेरी
न बजेंगे तेरे आगमन में ढोल
विजयी पताका न दुन्दुभि भेरी
नारायणी

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Randhil के द्वारा
July 11, 2016

Yo, that’s what’s up trhyfuullt.

yogi sarswat के द्वारा
April 29, 2013

नारी हूँ ,नारी ही ना समझ बिगड़ी तो काल बनूंगी तेरी तू अदना सा आदम क्या जाने ऋषि, देवो ने की स्तुति मेरी जब श्रापित होओगे पीड़ा से मैरी किसी जन्म में मुक्ति नही तेरी न बजेंगे तेरे आगमन में ढोल विजयी पताका न दुन्दुभि भेरी सुन्दर शब्द !

    narayani के द्वारा
    April 29, 2013

    नमस्कार योगी जी आपको रचना पसंद आई ,आपका बहुत आभार . स्नेह बनाये रखियेगा . धन्यवाद नारायणी


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