narayani

Kuch anubhav... Kuch vichar...

40 Posts

13533 comments

narayani


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by: Rss Feed

”खिलौना लल्ला का” – Contest

Posted On: 31 Jan, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Contest कविता में

2 Comments

“भूख”

Posted On: 30 Jan, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Contest कविता में

325 Comments

” वाह ” दीपावली ”आह ” दीपावली

Posted On: 1 Nov, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others social issues कविता में

1 Comment

”पिता और माता ”

Posted On: 15 Oct, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Junction Forum Others कविता में

2 Comments

”कमीज ”

Posted On: 29 Apr, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

330 Comments

”क्यों न समझी पीड़ा ”

Posted On: 26 Apr, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

3 Comments

कर्म

Posted On: 25 Jan, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

182 Comments

”प्रहरी”सैनिक

Posted On: 18 Jan, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

4 Comments

गाज

Posted On: 2 Jan, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

3 Comments

कबूल

Posted On: 28 Dec, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

Page 1 of 41234»

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

नारायणी जी , मानवीय संवेदना के छल का इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता की उसके पाले पशुं में उसे मादा प्रजाती में अपनापन नजर आता है ,पशुओं का नर समुदाय मानवीय संवेदना की उपेक्षा का शिकार रहता है, गाय ,बैल ,और जाने कितनी प्राजाति , पुराने समय में बनाये इस घटिया प्रर्था पर मुझे क्षोभ आता है , आज गर बेटिओं की विदाई रोक दे तो देखिएगा ,लोग बेटिओं के जन्म की दुआ मांगेंगे, आज बेटियाँ स्वावलंबी है तो समाज का नजरिया भी बदल रहा है , सच पूछिए तो रिश्ते बस पैसे से चलते है , सायद इसलिय लोग बेटिओं को बोझ और पराया समझते है , जिसने भी इस प्रथा को शुरू किया था , हम आज भी उसके जाल में फसे हुए है --------- बरसता तो है सावन,पर मेरी बेटी तेरे आंसुओ की झड़ी ज्यादा है तपता तो है सूरज, पर मेरी बेटी तेरे सुलगते हुए ह्रदय की अगन ज्यादा है समुन्दर गहरा है ज्यादा,पर मेरी बेटी आँखों में नमी तेरे ज्यादा है वंश चलता बेटो से,इसकी चर्चा ज्यादा है,पर मेरी बेटी, तू है अंश मेरा, इसका गर्व मुझे ज्यादा है माँ बाप के द्वारा बेटी को ऐसे ही शब्द कहे जाने की जरुरत है

के द्वारा: Chandan rai Chandan rai

के द्वारा: narayani narayani

के द्वारा: चन्दन राय चन्दन राय

के द्वारा: narayani narayani

के द्वारा: narayani narayani

के द्वारा: chandanrai chandanrai

के द्वारा: kraant kraant




latest from jagran