narayani

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narayani


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उपकार

Posted On: 4 Oct, 2012  
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राखी आ गई, कब आएगी तू – Jagran Junction Forum

Posted On: 29 Jul, 2012  
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बेटी मेरी जाई, तो कैसे पराई – Jagran Junction Forum

Posted On: 14 Jul, 2012  
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कल

Posted On: 24 Jun, 2012  
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इरादा

Posted On: 17 Jun, 2012  
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माँ के लिए लिखना आसान नही

Posted On: 12 May, 2012  
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आओ होली मनाये

Posted On: 7 Mar, 2012  
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अंश

Posted On: 4 Mar, 2012  
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परदेशी

Posted On: 26 Jun, 2011  
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याद रखो उसे

Posted On: 13 Jun, 2011  
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नारायणी जी , मानवीय संवेदना के छल का इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता की उसके पाले पशुं में उसे मादा प्रजाती में अपनापन नजर आता है ,पशुओं का नर समुदाय मानवीय संवेदना की उपेक्षा का शिकार रहता है, गाय ,बैल ,और जाने कितनी प्राजाति , पुराने समय में बनाये इस घटिया प्रर्था पर मुझे क्षोभ आता है , आज गर बेटिओं की विदाई रोक दे तो देखिएगा ,लोग बेटिओं के जन्म की दुआ मांगेंगे, आज बेटियाँ स्वावलंबी है तो समाज का नजरिया भी बदल रहा है , सच पूछिए तो रिश्ते बस पैसे से चलते है , सायद इसलिय लोग बेटिओं को बोझ और पराया समझते है , जिसने भी इस प्रथा को शुरू किया था , हम आज भी उसके जाल में फसे हुए है --------- बरसता तो है सावन,पर मेरी बेटी तेरे आंसुओ की झड़ी ज्यादा है तपता तो है सूरज, पर मेरी बेटी तेरे सुलगते हुए ह्रदय की अगन ज्यादा है समुन्दर गहरा है ज्यादा,पर मेरी बेटी आँखों में नमी तेरे ज्यादा है वंश चलता बेटो से,इसकी चर्चा ज्यादा है,पर मेरी बेटी, तू है अंश मेरा, इसका गर्व मुझे ज्यादा है माँ बाप के द्वारा बेटी को ऐसे ही शब्द कहे जाने की जरुरत है

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